पार्थ चटर्जी और इन जैसे और लोग इस राष्ट्र के कोढ़ हैं

नेहरुवीयन ज़माने से ही से इस देश में बुद्धिजीवी होने की पहली शर्त ये रही है, कि आप इस देश, यहाँ की संस्कृति-सभ्यता, यहाँ के प्रतीक चिन्हों, यहाँ के गौरवशाली इतिहास, यहाँ के सुरक्षा बलों और यहाँ के हर उस व्यक्ति का विरोध करें, जो इस राष्ट्र की जड़ों से जुड़ता है |

इस बात को एक बार फिर से स्थापित किया है कथित साहित्यकार पार्थ चटर्जी ने, जिन्होंने कश्मीर में सेना के मेजर लीतुल गोगोई द्वारा कश्मीर में एक पत्थरबाज को जीप से बांधकर कई लोगों की जान बचाने के तरीके को लेकर तथा पाकिस्तान प्रायोजित डर्टी युद्ध से निपटने हेतु सेना के लीक से हटकर अन्य प्रयासों की तुलना जलियाँवाला बाग़ के खलनायक जनरल डायर से करने का घिनौना अपराध किया है |

पार्थ चटर्जी और इन जैसे और लोग असल में इस राष्ट्र के कोढ़ हैं, जो जाने कब से यहाँ फल फूल रहे हैं और अब मोदी सरकार के आने के बाद से जब तब निकल कर बाहर आ रहे हैं | इन लोगों के जहर का बाहर आना बहुत जरुरी है ताकि सारा देश जान सके कि कैसे-कैसे आस्तीन के साँप इस देश में पल रहे हैं और देश को ऐसे लोगों से मुक्ति मिल सके |

Pages: 1 | 2

Leave a Reply

loading...