“शादी आदर की बात हो “

“अपनी जवानी की पत्नी के साथ आनंदित रह।”
– नीतिवचन 5 :18

 

क्या आप शादीशुदा हैं? अगर हाँ, तो क्या आप अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी से खुश हैं ? या आप पति- पत्नी के बिच गंभीर समस्याएं पैदा हो गयी हैं ? क्या आप दोनों के बिच दूरियां बढ़ गयी हैं?  क्या आप इस रिश्ते से ख़ुशी पाने के बजाय, इससे बस झेल रहे हैं ?

अगर इन सवालों के जवाब हाँ ! हैं तो आप शयद इस बात से दुखी हैं कि आप दोनों के बिच जो प्यार था, वह अब ठंडा पड़ गया है । एक विश्वाशी होने कि वजह से आप ज़रूर यह चाहेंगे | आपकी शादीशुदा ज़िन्दगी से आपके खुदा कि भी महिमा हो। इसलिए शायद आपके मौजूदा हालात आपको बहुत परेशान क्र रहे हों |

आपके दिल को दुःख पहुंचा रहे हों । आगे ऐसा है तो भी हिम्मत मत हारिए। यह सोचना सही नहीं होगा कि कुछ नहीं हो सकता ।
आप भी अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी में सुखों पा सकते हैं । कैसे ?

परमेश्वर के और करीब आइए और अपने साथी के भी :

अगर आप और आपकी साथी परमेश्वर के करीब आपने की पूरी कोशिश करे, तो आप एक-दूसरे के भी करीब आते जाएंगे।
वह कैसे?

इसे समझने के लिए आइए एक मिसाल पर गौर करें। मन लीजिये एक पहाड़ है। उस पहाड़ कि एक तरफ पति खड़ा है और दूसरी तरफ पत्नी खड़ी है। जब तक पति-पत्नी अपनी जेगाह खड़े रहते हैं|  तब तक इनके बिच दूरी बानी रहेगी। मगर जैसे-जैसे वे दोनों पहाड़ कि चोटी कि तरफ चढ़ना शुरू करते, वैसे- वैसे उनके बीच की दूरी घटती जाती है ।

दूसरे शब्दों मे, वे जितनी ज़्यादा उचाई पर चढ़ेंगे उनके बीच का फासला उत्तना ही कम होता जाएगा। यह मिसाल आपको जिस बात का यकीं दिलाती है |

क्या आप उस बात को समझ पाए ?


आपकी वह मेहनत है जो आप तन-मन से खुदा की सेवा करने में लगते हैं। क्योंकि आप खुदा से प्यार करते हैं| इसलिए आप पहले से उसकी सेवा में और आगे बढ़ने के लिए कड़ी मेहनत क्र रहे हैं । अब आप अगर पति-पत्नी के बीच दूरीयाँ बढ़ गयी हैं | तो ऐसा है मनो आप दोनों उस पहाड़ पर चढ़ रहे हैं मगर दो अलग-अलग दिशाओं से । लेकिन अगर आप चढ़ते जाएँगे तो क्या होगा?

बेशक, शुरुआत में आप दोनों के बीच काफी दूरी होगी। मगर जैसे-जैसे आप चोटी की तरफ चढ़ेंगे, यानि परमेशर के करीब आपने की जी-जान से कोशिश करेंगे,वैसे-वैसे आप अपने साथी करिबी आते जाएँगे। जी हाँ, अगर आप अपने साथी के करीब आना चाहते हैं तो उसके लिए एक ही रास्ता है की आप परमेश्वर के करीब आए ।

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